जब भगवान श्रीराम पृथ्वी को छोड़कर गए तब हनुमानजी ने भगवान श्री राम के वियोग में एक रामायण लिखी। रामायण लिखने के बाद हनुमान जी ने सोचा , यह  ग्रंथ किस को सुनाया जाए?तब हनुमान जी रामायण लेकर वाल्मीकि ऋषि के आश्रम में चले गए। वाल्मीकि ऋषि ने श्री राम जी के प्रकट होने  से पहले ही रामायण लिख दी थी।वाल्मीकि जी की रामायण संस्कृत में थी , और हनुमान जी की रामायण हिंदी में वाल्मीकि जी ने हनुमान जी का स्वागत किया।



हनुमान जी ने वाल्मीकि ऋषि से कहा, मैंने एक ग्रंथ लिखा है,पढ़िए कैसा है जब वाल्मीकि ऋषि ने पढ़ा वाल्मीकि ऋषि को वह  ग्रंथ अद्भुत लगा।वह रामायण पढ़ते पढ़ते वाल्मीकि ऋषि में सोचा। अगर यह रामायण रही, तो वाल्मीकि रामायण कौन पड़ेगा?

वाल्मीकि ऋषि ने कहा, यह ग्रंथ अद्भुत है। हनुमान जी को बहुत प्रसन्नता हुई तब हनुमान जी ने कहा, आप मुझसे कुछ मांग लीजिए। तब वाल्मीकि ऋषि ने कहा, अगर आप मुझे कुछ देना ही चाहते हो तो इस ग्रंथ को समुंद्र में बहा दो।तब हनुमान जी ने कहा, मैंने आपको वचन दिया इसलिए मैं इस ग्रंथ को समुंद्र में बहा दूंगा। मगर मैं आपको श्राप देता हूं। इसी ग्रंथ को लिखने के लिए आपको दोबारा जन्म लेना होगा।
कई संत कहते हैं वाल्मीकि जी ही तुलसीदास बनकर आए और रामचरितमानस की रचना की।