भगवान के नाम में इतनी शक्ति है पुराणों में लिखा है जो एक बार अपने  जीवन में भगवान का नाम ले ले उसके सारे पाप दूर हो जाते हैं।  

पुराणों में एक बहुत ही सुंदर कथा आती है। एक बार की बात है। एक बार बैकुंठ लोक में भगवान विष्णु के पास देवर्षि नारद गए और भगवान के सामने अपनी जिज्ञासा प्रकट की और देवर्षि नारद बोले भगवन ! में आपके नाम की महिमा जानना चाहता हूं। श्री हरि नारायण ने कहा, तुम मेरे नाम की महिमा जानना चाहते हो तो मृत्युलोक में जाओ और किसी भी कीड़े के समीप जाकर मेरे दिव्य नाम का उच्चारण करो फिर देवर्षि नारद मृत्युलोक में गए और देखा कि एक कीड़ा अपने स्वाभाविक गति से रेंग रहा है। देवर्षि नारद  ने  कीड़े के सम्मुख जाकर भगवान के दिव्य नाम का उच्चारण किया वह कीड़ा उसी क्षण मर  गया।

फिर देवर्षि नारद वैकुंठ लोक में गए भगवान श्री हरि नारायण के सामने उन्होंने पूरी घटना सुनाई  भगवान नारायण मुस्कुराए और कहा मृत्युलोक जाओ वहां फूल पर तितली बैठी होगी उसको मेरा पावन नाम सुनाओ, देवर्षि नारदजी ने देखा मृत्युलोक कि एक फूल पर  तितली बैठी है देवर्षि नारद ने  तितली के पास जाकर भगवान का नाम सुनाया तितली नाम सुनते ही मर गई।नारद जी, फिर भगवान के पास गए और उन्हें पूरी घटना सुनाई। आपके नाम सुनते ही तितली तो मर गई भगवान ने कहा, कोई बात नहीं  इस बार किसी के हिरण बच्चे के सामने मेरा पवित्र नाम सुनाओ नारद जी मृत्युलोक लोग गए और नारद जी ने देखा एक हिरण का बच्चा खेल रहा है। नारद जी ने उसके सामने भगवान का दिव्य नाम सुनाया तो हिरण का बच्चा उसी क्षण मर गया।

देवर्षि नारद यह सब देख कर बहुत दुखी हुए भगवान नारायण के पास गए और उन्हें पूरी घटना सुनाई और और कहां भगवान जिस जिस को मैं आपका पवित्र नाम सुना रहा हूं वह उसी समय मर रहे हैं।भगवान श्री हरि नारायण में देवर्षि नारद को बहुत समझाया और कहा, तुम एक बार पुनः मृत्यु लोक में जाओ और  किसी गाय के बच्चे  के सामने मेरा पवित्र नाम लेना?,देवर्षि नारद इस बार ना चाहते हुए भी मृत्यु लोक में गए और एक गाय के बच्चे  के सामने भगवान का नाम सुनाया उस गाय का  बच्चा भी उसी समय मर गया।

इस बार नारद जी दौड़े-दौड़े भगवान नारायण के पास गए और कहां भगवन बंद कीजिए अपना यह नाटक मुझे नहीं जनानी आपकी नाम की महिमा जिस ,जिस जीव के सामने मैं आपका पवित्र नाम भी ले रहा हूं, वह उसी समय मर जा रहे हैं।भगवान नारायण बोले, शांत हो जाओ नारद एक बार मेरे कहने पर मृत्यु लोक में फिर से जाओ। इस बार जीव-जंतुओं पर नहीं  मनुष्यों पर मेरे नाम का प्रभाव देखो। काशी नरेश के यहां एक पुत्र ने जन्म लिया है। उसके कानों में मेरा अलौकिक नाम सुनाओ।

नारद जी बोले, प्रभु इस बार मैं नहीं जाऊंगा। भगवान नारायण के समझाने पर नारद जी चले गए काशी नरेश के वहां।नारद जी डरे डरे जा रहे थे। क्या पता भगवान का नाम लेते ही वह शिशु ना मर जाए।जब नारद जी काशी नरेश के वहां पहुंचे  काशी नरेश को पता चला कि नारद जी आए हैं। काशी नरेश ने नारद जी का बहुत सम्मान किया।और काशी नरेश ने कहा, मेरे यहां एक शिशु ने जन्म दिया है। कृपया करके उस शिशु को आप आशीर्वाद दीजिए

फिर नारद जी ने उस शिशु को अपनी गोद में पकड़ा और उसके कानों में भगवान का दिव्य नाम का उच्चारण किया। नारद जी ने जैसे ही भगवान का नाम सुनाया, शिशु ने बोलकर नारद जी को प्रणाम किया। नारद जी यह देखकर बहुत आश्चर्यचकित रह गए और बोले, यह कौन सी शक्ति है?फिर वह शिशु बोला , नारद जी आप घबराइए मत मैं भी वह कीड़ा, तितली, हिरण और गाय का बछड़ा हूं जिस के समीप आपने भगवान का दिव्य नाम उच्चारण किया जिससे मेरी सहज में मुक्ति हो गई और मुझे मानव देह प्राप्त हुआ।फिर नारद जी के सारे संशय दूर हो गए और वह बैकुंठ लोक में गए और कहा ! हे प्रभु आप की महिमा अपरंपार है।