श्री रामचरितमानस के अनुसार एक कथा आती है। जब राम जी लक्ष्मण और माता सीता के साथ अयोध्या लौट आए तब भगवान राम के राज्याभिषेक के बाद एक बार  राम जी अपनी प्रजा के साथ राज दरबार में बैठे हुए थे। तब उस समय हनुमान जी माता सीता के कक्ष में जा पहुंचे। उन्होंने देखा कि माता सीता  लाल रंग की कोई चीज मांग में सजा रही है। तब हनुमान जी ने बड़े ही उत्सुकता से पूछा। मैया आप यह क्या लगा रही हैं तब माता सीता ने कहा, यह सौभाग्य का प्रतीक सिंदूर है। इसे लगाने के बाद तुम्हारे प्रभु श्री रामचंद्र जी की आयु लंबी हो जाती है।यह सुनकर हनुमानजी को रहा नहीं गया। माता सीता के जाने के बाद उन्होंने अपने पूरे शरीर में लाल सिंदूर लगा दिया तथा मन में विचार करते रहे अब तो मेरे प्रभु श्री राम जी की आयु बहुत लंबी हो जाएगी।

सिंदूर लगाने के बाद हनुमान जी राज दरबार में गए। उन्हें देखकर राज्य  के सभी दरबारी हनुमान जी पर जोर जोर से हंसने लगे।रामजी भी हनुमान जी के शरीर में सिंदूर देखकर हैरान रह गए और उन्होंने पूछा, हनुमान तुमने शरीर में सिंदूर क्यों लगा रखा है?हनुमान जी बोले, प्रभु इस सिंदूर से आप अमर हो जाएंगे क्योंकि मुझे माता सीता ने बताया कि सिंदूर लगाने से आपकी उम्र बढ़ जाती है। तब मैंने सोचा जब चुटकी भर सिंदूर लगाने से आपकी उम्र लंबी होती है तो? पूरे शरीर में सिंदूर लगा लूंगा तो आप अमर हो जाएंगे हनुमान जी के वचन सुनकर भगवान श्री राम जी भाव विभोर हो गए और  राम जी ने हनुमान जी को अपने गले से लगा लिया।

तब राम जी ने हनुमान जी को वरदान  दिया जो हर मंगलवार को तुम्हें सिंदूर अर्पण करेगा  या सिंदूर का चोला चलाएगा। उसके सारे कष्ट दूर हो जाएंगे।

उस समय से हनुमान जी को सिंदूर अति प्रिय है सिंदूर अर्पित करने वाले पर हनुमान जी प्रसन्न रहते हैं।