कहते है हनुमान जी को मंगलवार बहुत पसंद है।  मंगलवार के दिन जी हनुमान जी की पूजा करने से सारे  संकट दूर हो जाते है।   मंगलवार  का व्रत करने से और कथाये सुनने से बहुत लाभकारी होता है।

मगर एक हनुमान जी का पचमुखी अवतार भी है।  हनुमान जी अपना पंचमुखी रूप इसलिए धारण किय।  इसके पीछे एक कथा है।  जब भगवान  श्री राम और रावण के बिच युद्ध चल रहा था रावण ने सोचा वह हार गया।  तब रावण ने उस समय अहिरावण को याद किया।  अहिरावण माँ भावनी का बहुत  बड़ा भक्त था। वह तंत्र मंत्र जनता था।  रावण के याद करने पर अहिरावण रावण के पास आया।  रावण के कहने पर अहिरावण ने भगवान श्री राम के पूरी सेना को अज्ञाननिद्रा  मे डाल दिया।  और अहिरावण भगवान श्री राम को लक्ष्मण जी को पातल लोक ले गया।  



फिर थोड़ी समय की बाद  उनको   होश आया तब तक विभीषण यह बात जान चुके थे।  यह सब  अहिरावण की माया है।  तब हनुमान जी कहा मे श्री राम और लक्षमण जी के मे सयहता करूँगा।  जब हनुमान जी पातल लोक पहुंचे।  वहा हनुमान जी अपने  पुत्र मकरध्वज मिले और श्री राम और लक्ष्मण जी से भी मिल गए। हनुमान जी वहा सब कुछ देखा मगर उनकी नजर पांच दीपक पर पड़ी।  वे सभी दीपक पांच अलग अलग जगह पर जल रहे थे।  वे सभी दीपक अहिरावण ने माँ भावनी के लिए जलाये थे।  विभीषण जी ने हनुमान जी को बताया था उन पांच दीपक को एक साथ भुजा दिया तो।  अहिरावण का वध हो जायेगा।  इसलिए हनुमान जी ने पंचमुखी अवतार धारण किया।

उत्तर दिशा मे वराहमुख ,  पश्चिम  दिशा मे नरसिंघ मुख, दक्षिण  मे गरुण मुख ,आकश की तरफ हयग्रीव मुख , पूर्व की तरफ हनुमान की मुख , इन पंचमुखी रूप धारण करके  हनुमान जी ने पांचो दीपक बुझाये  और अहिरावण का वध किया।  

तब से भगवान हनुमान जी की पंचमुखी अवतार की ये कथा प्रचलित है।