एक समय की बात है। ब्रह्मा जी के पुत्र दक्ष प्रजापति थे। उनकी  60  कन्याएं  थी। दक्ष प्रजापति ने अपने 27 कन्या का विवाह चंद्रमा के साथ किया 27 कन्या में से एक कन्या का नाम रोहणी था।चंद्रमा का अत्यधिक प्रेम रोहिणी के साथ था। रोहिणी के 26 बहने रोहणी से ईर्ष्या करने लगी। 

एक बार 26 बहनों ने आकर दक्ष प्रजापति से चंद्रमा की शिकायत की।  दक्ष प्रजापति ने चंद्रमा को बुलाकर समझाया। चंद्रमा ने दो 4 महीने तक अच्छा व्यवहार किया। फिर चंद्रमा ने रोहिणी के साथ ज्यादा रहने लगे। 26 बहनों ने फिर आकर  दक्ष  प्रजापति से चन्द्रमा  शिकायत की।दक्ष प्रजापति को बहुत गुस्सा आया। फिर दक्ष  प्रजापति ने चंद्रमा को कहा चंद्रमा मैंने तुम्हें बहुत समझाया, मगर तुम नहीं माने। मैं तुम्हें श्राप देता हूं। तुमने भेदभाव किया है। तुम्हें अपने रूप का अभिमान है। तुम 6  रोगो से ग्रसित  हो जाओ  और  तुम घटते  रहोगे और बढ़ते रहोगे।

फिर दक्ष प्रजापति की 26 कन्याओं को बड़ा गुस्सा आया आया। उन्होंने कहा, पिताजी हमने आपको श्राप देने को नहीं कहा। दक्ष प्रजापति को अपनी गलती का बड़ा एहसास हुआ।

फिर चंद्रमा घटने और बढ़ने लगे। फिर सब देवता ब्रह्मा देव के पास गए। ब्रह्मदेव ने चंद्रमा के पास आये । उन्होंने कहा, तुम प्रभात क्षेत्र में जाओ पार्थिव शिवलिंग बनाओ और महादेव के मंत्रों का जप करो। फिर चंद्रमा ने प्रभात क्षेत्र में जाकर महादेव की तपस्या की। कुछ महीनों बाद महादेव प्रकट हो गए। महादेव ने कहा, मांगो क्या मांगते हो? चंद्रमा ने कहा, महादेव  मेरा रोग  दूर कर दो। महादेव ने कहा, एक पक्ष तुम बढ़ोगे  और एक पक्ष तुम घाटगे ।और भगवान महादेव ने कहा जो भी इस जगह सच्चे भाव से आएगा, उसका सारा रोग दूर हो जाएगा। आज से यह जगह सोमनाथ के नाम से प्रसिद्ध होगा।