जय और विजय दोनों भगवान श्री हरि नारायण के द्वारपाल है।काफी दिनों से जय और विजय दोनों के अंदर बहुत ज्यादा अहंकार आ गया था। वह अपने आप को बहुत बड़ा समझने लगे थे। भगवान अपने भक्तों के अंदर अहंकार बिल्कुल पसंद नहीं करते इसलिए एक दिन जय और विजय का अहंकार तोड़ने के लिए भगवान श्री हरि नारायण में एक लीला रची।
एक बार सनत, सनन्दन, सनातन, सनत्कुमार यह चारों कहलाते हैं सनकादि ऋषि कहलाते हैं।एक बार सनकादि ऋषि के मन में भगवान नारायण के दर्शन के इच्छा उत्पन्न हुई। इसलिए वह बद्रीनाथ से बैकुंठ की ओर भगवान नारायण के दर्शन के लिए गए जब वह बैकुंठ के द्वार पर पहुंचे। जय और विजय दो द्वारपालों ने उन्हें अंदर आने के लिए मना कर दिया।सनकादि मुनियों ने तीन बार जय विजय को आग्रह किया। हमें भगवान के दर्शन करने दो मगर जय विजय ने उन्हें भीतर आने से मना कर दिया।उनके मना करने पर सनकादि मुनियों को क्रोध आ गया और उन्होंने कहा, अरे मूर्खो हम तो भगवान विष्णु के भक्त हैं।मगर तुम्हें भगवान नारायण के द्वारपाल होने पर अहंकार आ गया है। इस अहंकार को तोड़ना आवश्यक है। तुमने हमें तीन बार अंदर आने से रोका इसलिए तुम तीन जन्मों तक मृत्यु लोक में जाओगे और राक्षस की योनि में रहोगे?
द्वार पर कोलाहल सुनकर भगवान विष्णु माता लक्ष्मी के सहित आए। सनकादिक मुनियों ने पूरी घटना भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को सुनाई। तब भगवान विष्णु ने कहा है सनकादिक मुनियों यह जय और विजय मेरे पार्षद है। इन दोनों ने अहंकार में आकर आप का अपमान किया।आप लोग मेरे प्रिय भक्त है। और उन्होंने आपकी अवज्ञा करके आपका अपमान किया है। आपने इन्हें श्राप देकर उत्तम किया है। इन दोनों की तरफ से मैं आपसे क्षमा याचना करता हूं।भगवान नारायण की मधुर वाणी सुनकर सनकादिक मुनियों का क्रोध शांत हो गया।भगवान विष्णु ने कहा है मुनि गणों आपने जो श्राप दिया है वह मेरी ही प्रेरणा से हुआ है सनकादिक मुनियों ने कहा, जय और विजय तीन जन्म लेंगे तब आपके ही हाथों से इनका उद्धार हो होगा।
जय और विजय पहले जन्म में हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष के रूप में जन्म लिया।तब भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर ही हिरण्याक्ष का वध किया और नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकशिपु का वध किया। दूसरे जन्म में दोनों रावण और कुंभकरण के रूप में जन्म लिया और राम अवतार में दोनों भगवान श्री राम के हाथों से मारे गए। तीसरे जन्म में दोनों शिशुपाल को दंतवर्क के रूप में जन्म लिया। तब भगवान श्री कृष्ण की हाथों से मारे दोनो गए तथा उन्हें श्राप से भगवान नारायण ने मुक्ति दिला दी।



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Namo Narayan🙏🙏
ReplyDeleteNamo Narayan
ReplyDeleteNyc 💞💞💕
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