महाभारत में कथा इस प्रकार आती है। एक बार महाबली भीम को अपनी शक्ति पर बहुत अहंकार हो गया था। वह सोचने लगे कि इस दुनिया में मैं ही सबसे बलवान हूं क्योंकि उनके अंदर 100 हाथियों का बल था।और भगवान अपने सेवकों में किसी प्रकार भी अभिमान रहने नहीं देते। इसलिए श्री कृष्ण भगवान ने एक लीला रची।एक दिन द्रौपदी ने भीम कहा, आप श्रेष्ठ गदाधारी हैं और बलवान भी है। आप मुझे गंधमादन पर्वत से दिव्य वृक्ष के दिव्य पुष्प लाकर दे मुझे वह बहुत प्रिय है।भीम ने द्रौपदी की बात मान ली। वह पुष्प लेने चले गए।
भीम बड़ी ही मस्ती से गदा अपने कंधे पर रखते हुए चले जैसे आगे चले उनके कदम चलते चलते रुक गए।भीम ने देखा एक वृद्ध लाचार और कमजोर वानर मार्ग के एक बड़े पत्थर पर बैठा है। उसने अपनी पूंछ को उस पत्थर तक बिछा रखी है जिससे रास्ता रुक गया है। पूंछ हटाए बिना आगे भीम जा नहीं सकते।,
तब भीम ने कहा, वानर अपनी पूंछ को हटाओ मैंने आगे बढ़ना है।
भीम ने दोबारा कहा वानर मैंने कहा ना कि अब की पूंछ हटाओ मैंने आगे जाना है। तुम वृद्ध हो इसलिए कुछ नहीं कह रहा।
तब भीम ने आगे बढ़कर अपने बाएं हाथ से पूंछ को पकड़ा मगर पूंछ को भीम हिला भी नहीं सके। भीम हैरान हो गए फिर भीम ने दाएं हाथ से पूंछ हिलाने की कोशिश की मगर भीम दाएं हाथ से भी पूंछ को हिला नहीं सके।भीम को गुस्सा आ गया। भीम ने दोनों हाथों से पूंछ को पकड़ने की कोशिश की मगर मगर पूछ तिलमात्र भी नहीं हिली भीम को बहुत पसीना आ गया था। वह थक भी गए थे।
भीम को समझ में आ गया कि यह कोई मामूली वानर नहीं है। भीम ने हाथ जोड़कर कहा हे वानर श्रेष्ठ मैं आपको पहचान नहीं सका। कृपया करके मुझे अपना दर्शन दे आप कौन हैं?
वृद्ध वानर ने आगे बढ़कर कहा भीम मैं तुम्हें पहचान गया। तुम पवनपुत्र हो और मैं भी पवन पुत्र हनुमान हूं।हनुमान जी ने भीम से कहा, तुम्हें अपनी शक्ति का अभिमान हो गया था। शक्ति का ताकत का अभिमान ना करो क्योंकि यह ताकत और बल तुम्हारा नहीं है। भगवान ने तुम्हें दिया है। जो तुम्हारे पास यह शरीर है,यह भी तुम्हारा नहीं है।यह भी भगवान ने दिया है और जो चीज भगवान की है, वह किसी और की कैसे हो सकती है
भीम की आंखें खुली और भीम को अपनी गलती का एहसास तब हनुमान जी ने भीम को आशीर्वाद देकर वहां से अंतर्ध्यान हो गए।



4 Comments
Jai Shri Ram🙏🙏🙏
ReplyDeleteJai Shri Ram
ReplyDeleteJai shri Ram♥️♥️♥️♥️
ReplyDeleteJai Shri Ram😍😍
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