एक समय की बात है। एक बार पक्षीराज, गरुड़ और सुदर्शन चक्र में आपस में श्रेष्ठ होने में अहंकार आ गया था।।एक बार गरुड़ देव और सुदर्शन चक्र में श्रेष्ठा के बीच में बहस हो गई एक समय की बात है एक बार भगवान श्री कृष्ण और सत्यभामा राज सिंहासन में बैठे हुए थे।उनकी सेवा में सुदर्शन चक्र और गरुड़ देव भी थे। बातों बातों में गरुड़ देव ने कहा भगवन, मुझ से भी तेज दुनिया में कोई और उड़ सकता है।इसी बीच सुदर्शन चक्र भी बोले
भगवान मैंने बड़े-बड़े युद्ध में आप को जीत दिलाई है।क्या संसार में मुझसे भी कोई शक्तिशाली है भगवान श्रीकृष्ण मुस्कुराए और समझ गए। इन दोनों में अभिमान आ गया है
तब भगवान श्रीकृष्ण ने सोचा इनका घमंड तोड़ना होगा।तब भगवान श्रीकृष्ण ने गरुड़ देव के कहा गरुड़ जाओ, हनुमान को मेरा संदेश दो भगवान श्री राम और माता सीता तुम्हारी द्वारका में प्रतीक्षा कर रहे हैं।भगवान श्रीकृष्ण से आज्ञा मिलते ही गरुड़ देव हनुमान जी लेने चले गए।भगवान श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र को आज्ञा दी कि तुम महल के प्रवेश द्वार पर पहरा दो और मेरी आज्ञा के बिना महल में कोई प्रवेश ना कर पाए?
भगवान श्री कृष्ण ने सत्यभामा से कहा, आप सीता के रूप में तैयार हो जाओ और भगवान श्री कृष्ण भगवान श्री राम का रूप धारण कर लिया इधर गरुड़ देव में हनुमान जी से कहा,हे कपि श्रेष्ठ! द्वारका में प्रभु श्री राम और माता सीता आपसे मिलने के लिए पधारे हैं। कृपया करके मेरे साथ चलिए।आप मेरे कंधों पर बैठ जाइए मैं आपको शीघ्र अपने कंधे में बैठाकर द्वारका पहुंचा दूंगा।तब हनुमानजी ने गरुड़ देव से कहा, आप चलिए मैं आता हूं।गरुड़ देव जब द्वारका पहुंचे।जब गरुड़ देव ने महल में जाकर देखा तो वह आश्चर्यचकित रह गए उन्होंने देखा हनुमान जी प्रभु श्री राम की सेवा में उनसे पहले आ चुके थे।
हनुमान जी के प्रभु श्रीराम ने कहा पवन पुत्र तुम बिना आज्ञा के महल में कैसे आ गए तुमको किसने रोका नहीं हनुमान जी ने प्रभु श्रीराम के सामने हाथ जोड़कर सुदर्शन चक्र को अपने मुंह से बाहर निकाल दिया तब हनुमान जी ने श्री राम से कहा प्रभु मुझे आपसे मिलने से कोई नहीं रोक सकता इस सुदर्शन चक्र ने मुझे बाहर ही रोक दिया इसलिए मुझे इस सुदर्शन चक्र को अपने मुंह में रखना पड़ा
अंत में हनुमान जी ने हाथ जोड़कर कहा प्रभु मैं तो आपको पहचानता हूं। आप ही श्री कृष्ण के रूप में प्रभु श्रीराम हैं। परंतु आपने आज ऐसा क्यों किया? तब श्री राम ने कहा, मुझे अपने भक्तों का अहंकार तोड़ने के लिए ऐसा करना पड़ा।
तब सुदर्शन चक्र और गरुड़ देव को अपनी गलती का एहसास हुआ।.


4 Comments
Jai Shri Ram
ReplyDeleteSita ram🙏🙏
ReplyDeleteSita ram😍😍
ReplyDeleteJai Shri Ram💕
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